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Story of the Golden Squirrel Jungle Story
सोने की गिलहरी की कहानी एक रोचक और शिक्षाप्रद कहानी है जो बताती है कि झूठ और दिखावा कभी टिकता नहीं। एक गिलहरी का सोने का रंग और उसकी चालाकी के बारे में पढ़ें यह मनोरंजक कथा।
जंगल से शहर का सफर और एक दुर्घटना
एक जंगल में एक छोटी सी चंचल गिलहरी रहती थी, जो हमेशा नए स्वाद और रोमांच की तलाश में रहती थी। एक दिन उसने तय किया कि अब जंगल का साधारण खाना उसके लिए बहुत उबाऊ हो गया है। उसे शहर के स्वादिष्ट भोजन चखने थे। वह एक सड़क किनारे पेड़ पर बैठ गई और एक सब्जियों से भरे ट्रक पर सवार होकर शहर पहुँच गई।
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शहर में उसने दुकानों से अनाज चुराया, एक आदमी के टिफिन से रोटी-अचार खाया, और फिर भागते-भागते एक अजीब जगह पर जा पहुँची। वहाँ होली के रंग तैयार किए जा रहे थे। गिलहरी ने सोचा कि चमकदार सोने का रंग भी कोई स्वादिष्ट शहद या खाना ही होगा। उत्सुकता में वह एक विशाल सोने के रंग के ड्रम के किनारे चढ़ गई, पर संतुलन खो बैठी और सीधे उस चिपचिपे रंग में जा गिरी! लोगों ने उसे बड़ी मुश्किल से बाहर निकाला।
सोने की गिलहरी बनकर वापसी और झूठ की नींव
धूप में सूखने के बाद जब गिलहरी ने खुद को देखा, तो वह चमकती सोने की मूर्ति जैसी लग रही थी! वह बहुत खुश हुई और एक बस पर सवार होकर वापस अपने जंगल लौट आई। जंगल के सभी जानवर हैरान रह गए। उन्होंने कभी ऐसा चमकता हुआ जीव नहीं देखा था।
एक कबूतर के पूछने पर, गिलहरी ने झट से एक झूठी कहानी गढ़ दी। उसने दावा किया कि वह एक दूरस्थ परियों के देश से आई है, जहाँ सभी जानवर सोने के बने होते हैं। मासूम जानवरों ने उसकी बात मान ली और उसे एक विशेष अतिथि मानकर तरह-तरह के स्वादिष्ट फल और अनाज भेंट करने लगे। गिलहरी का तो जैसे स्वर्ग ही खुल गया।
Wikipedia Reference (गिलहरी के बारे में):
गिलहरी छोटे या मध्यम आकार के कृंतक (rodent) होते हैं जो अपनी फुदकने और पेड़ों पर चढ़ने की क्षमता के लिए जाने जाते हैं। इनकी पूँछ आमतौर पर घनी और पूंछदार होती है। गिलहरी की कई प्रजातियाँ दुनिया भर में पाई जाती हैं। आप गिलहरी के बारे में और अधिक जानकारी यहाँ पढ़ सकते हैं।
भोले कौए की सेवा और चालाकी का फल
एक दिन एक काला कौआ उसके पास आया, जो अपने रंग के कारण हमेशा चिढ़ाया जाता था। उसने गिलहरी से विनती की कि उसे भी परियों के देश ले चले ताकि वह भी सुनहरा बन सके। चालाक गिलहरी ने इसका फायदा उठाया और कौए को अपनी नौकर बना लिया। बदले में उसने उसे सुनहरा बनाने का झूठा वादा किया। बेचारा कौआ दिन-रात उसके लिए तरह-तरह के फल और दाने जुटाने लगा।
बारिश ने खोला राज और मिली सच्ची सीख
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लेकिन एक दिन अचानक मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। गिलहरी के सोने का रंग बहने लगा और उसका असली भूरा रंग दिखाई देने लगा। सारा राज खुल गया। कौआ सबसे ज्यादा नाराज हुआ और सबके सामने गिलहरी की सच्चाई उजागर कर दी।
जब जंगल के राजा शेर ने मामले की सुनवाई की, तो गिलहरी ने रोते हुए सारी सच्चाई कबूल कर ली। शेर ने उसे माफ तो कर दिया, लेकिन एक कड़ी सीख देते हुए कहा: "अच्छा खाने के शौक ने तुम्हें झूठ का सहारा लेने पर मजबूर कर दिया। याद रखो, झूठ की इमारत कभी टिकती नहीं, एक दिन प्रकृति खुद उसे धो देती है।" गिलहरी ने वादा किया कि अब वह कभी झूठ नहीं बोलेगी और न ही शहर भागेगी।
कहानी की सीख:
दिखावा और झूठ से मिली महानता कभी टिकाऊ नहीं होती। सच्चाई चाहे कितनी भी साधारण क्यों न हो, एक दिन सामने आ ही जाती है। बुद्धिमान वही है जो सरल और ईमानदार जीवन जीता है।
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